विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?

विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?

विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है? ये सवाल हम सभी के मन में आता है खासकर तब जब चुनावो का मौसम हो। अगर आप भी इन्ही सवालो का जबाब ढूंढ रहे है तो हमारे इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े। क्योकि इस राज्य विधान परिषद क्या है? औरविधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है? आर्टिकल में हमने सरल शब्दो में विस्तार से राज्य विधान परिषद क्या है? राज्य विधान परिषद की रचना, राज्य विधान परिषद में सदस्य बनने के लिए योग्यता, विधान परिषद की अवधि या कार्य – काल, और विधान परिषद की शक्तियाँ एवं कार्य क्या है? को समझाया है। इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े। तो आइये बिना किसी देरी के जानते है की राज्य विधान सभा क्या है?

विधान परिषद क्या है?

विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?
विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?

केन्द्र की तरह ही कानून बनाने का काम विधान मंडल द्वारा किया जाता है।कुछ राज्यों में विधान मंडल के दो सदन हैं जब की कुछ राज्यों में एक सदन है।
जहां पर विधान मंडल दो सदन है वहां पर दोनों सदनों के नाम इस प्रकार है – विधान सभा और विधान परिषद। विधान सभा विधान मंडल का निचला सदन है और प्रतक्ष्य रूप में राज्य की जनता द्वारा वोट के आधार पर चुना जाता है।

विधान परिषद के सदस्य कुछ अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते है और कुछ नामजद भी किए जाते है। इसी लिए सभी राज्यों में विधान सभा है। बिहार, महाराष्ट्र,उत्तरप्रदेश,कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में विधान मंडल के दो सदन है।

जब की और राज्यों में,जैसे की पंजाब,हरियाणा,हिमाचल प्रदेश,राजस्थान, पश्चीमी बंगाल,गुजरात, त्रिपुरा,मणिपुर,मेघालिया,सिकीम,नागालैण्ड,केरल आदि राज्यों में विधान मंडल का एक सदन है।

भारत के कुछ राज्य में विधान मंडल के दो सदन मौजूद है जैसे कि उत्तर प्रदेश,बिहार, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, आंध्रा प्रदेश,तेलंगाना और महाराष्ट्र। जिन राज्यों में विधान मंडल के दो सदन मौजूद है वहां पर विधान मंडल के उपर वाले सदन को विधान परिषद कहा जाता है।

हरियाणा,पंजाब,हिमाचल प्रदेश आदि राज्य में विधान परिषद नहीं है,क्यों कि इन राज्यों में विधान मंडल का एक ही सदन है। संविधान की धारा 169 के अनुसार यह वयवस्था की गई है की अगर विधान सभा अपने सदस्य की गिनती को स्पष्ट बहुमत पर हाज़िर और वोट डालने वाले सदस्य के दो तिहाई बहुमत से बिल पास करके सांसद को विधान परिषद के बनाने या उस को ख़त्म करने की विनती मंज़ूर करेगी अर्ताथ विधान परिषद का बनना और टूटना विधान सभा के हाथ में हैं।

विधान परिषद वाले राज्य कौन-कौन से है ?

भारत के 29 राज्यों में से कुल 6 राज्य ऐसे है जो विधान परिषद वाले राज्य उनके नाम और सदस्यों की संख्या इस प्रकार है:

  • उत्तर प्रदेश (100 सदस्य)
  • आंध्र प्रदेश (90 सदस्य)
  • महाराष्ट्र (78 सदस्य)
  • बिहार (75 सदस्य)
  • कर्नाटक (75 सदस्य)
  • तेलंगाना

05 अगस्त 2019 से पहले जम्मू कश्मीर भी विधान परिषद और विधान सभा वाले राज्य की सूची में था। लेकिन फ़िलहाल जम्मू कश्मीर केंद्र साषित प्रदेश है।

विधान परिषद की रचना

विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?
विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?

विधान परिषद राज्य विधान मंडल का ऊपरी सदन होता है। इस के सदस्य की गिनती 40 से कम और विधान सभा के सदस्य की गिनती के ⅓  से ज्यादा नहीं हो सकती।परन्तु जम्मू और कश्मीर की विधान परिषद में कुल 36 सदस्य थे । विधान परिषद के सदस्य जनता द्वारा सीधे रूप से नहीं चुने जाते, बल्कि इस का चुनाव जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा से निन्म लिखित रूप से किया जाता है।

  • लगभग ⅓ सदस्य स्थानिक संस्थाएं द्वारा चुने जाते है।
  • लगभग ⅓ विधान सभा के मैंबर द्वारा चुने जाते है।
  •  लगभग 1/12 सदस्य,राज्य के हाई सैकंडरी स्कूल या इस से उच्ची शिक्षा संस्थाओं में कम से कम तीन साल से पढ़ाई का कार्य करने वाले अध्यापक द्वारा चुने जाते है।
  • बाकी के लगभग 1/16 सदस्य राज्यपाल द्वारा ऐसे व्यक्तियों में नामजद होता है, जिन को विज्ञान,कला,साहित्य,समाज सेवा आदि के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या तजुर्बा प्राप्त हो।

विधान परिषद के सदस्य चुने जाने के लिए योग्ताए

विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?
विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?

विधान परिषद के सदस्य चुने जाएं या नामजद होने के लिए किसी भी व्यक्ति में नीचे लिखी योग्यता का होना बेहद जरूरी है –

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • वह 30 साल की उम्र पूरी कर चुका हो।
  • वह किसी सरकारी लाभदायक ओहदे पर विराजमान ना हो।
  • वह कानून द्वारा निश्चित और योगताये रखता हो।
  • वह कानून द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अनुसार विधान परिषद का सदस्य बनने अयोग्य ना हो। 
  • वह दिवालिया ना हो, पागल ना हो और किसी अदालत द्वारा अयोग्य करार ना किया गया हो। अगर चुने जाने के बाद उस में ऐसी कोई अयोग्यता उत्पन हो जाए या वह लगातार 60 दिन तक सदन की मंजूरी के बिना समागम में गैर हाज़िर रहे,तब उसकी जगह ख़ाली घोषित की जा सकती है।

विधान परिषद का अवधि या कार्य-काल

विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?
विधान परिषद क्या है? और विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है?

विधान परिषद राज्य का एक स्थाई सदन है, जिस के सदस्य राज्य सभा की तरह 6 साल के लिए चुने जाते है, परंतु सारे सदस्य एक ही समय पर नहीं चुने जाते है। इस के ⅓  सदस्य हर दो साल के बाद हट जाते है, परंतु हटे हुए सदस्य दुबारा चुनाव लड़ सकते है। राज्यपाल विधान परिषद को भंग नहीं कर सकता है।

विधान परिषद में कार्यसाधक संख्या(Quorum)-

संविधान के अनुसार विधान परिषद का अधिवेशन आरंभ होने के लिए यह जरूरी है की इस के कुल सदस्य का 1/10 भाग या 10 सदस्य हाज़िर हो, परंतु 42 वी संशोधन के अन्तर्गत यह व्यवस्था की गई है की विधान मंडल के हरेक सदन अपनी कार्यसाधक खुद निश्चित कर सकते है, पर 42 वीं  संशोधन के अधीन किए गए प्रबंध को अभी तक लागू नहीं किया गया है। इस लिए अभी तक 42 वीं संशोधन से पहले का प्रबंध लागू है।

विधान परिषद का सत्र (अधिवेशन )(Session)-

राज्यपाल परिषद का अधिवेशन किसी भी समय पर बुला सकता है, परंतु दो अधिवेशन में 6 महीने से ज्यादा समय नहीं बीतना चाहिए। राज्यपाल साधारण कारण राज्य के विधान मंडल के दोनों सदनों की बैठक एक ही समय बुला सकता है।

विधान परिषद के अधिकारी (Officer)

विधान परिषद के एक सभापति (Chairman)  और एक उप – सभापति ( Deputy Chairman)  होता है। इन का चुनाव विधान परिषद के सदस्य  अपने में ही करते है। इन सब को प्रस्ताव पास करके सदस्य को हटाया भी जा सकता है।
परंतु ऐसा प्रस्ताव उस समय तक पेश नहीं किया जा सकता, जब तक की इस महत्व की एक पूर्ण – सूचना कम से कम 14 दिन पहले नहीं दी गई हो, सभापति विधान परिषद की बैठक की प्रबांगी मंजूरी करता है, और अनुसाशन कायम रखता है ताकि जो विधान परिषद अपना काम ठीक तरह से कर सके।
सभापति की शक्तियां और काम वहीं है जो विधान सभा के स्पीकर के है। सभापति की गैर हाजरी में उप – सभापति विधान परिषद की अगुआई करता है।

विधान परिषद के सदस्य का वेतन और भत्ते(Salary and Allowances)-

विधान परिषद के सदस्य को विधान मंडल द्वारा निश्चित वेतन और भत्ते मिलते है,जो की विधान सभा के सदस्य के बराबर है। इन को भाषण देने की पूरी छूट है और सदन में कहे गए किसी शब्द के आधार पर इन के विरूद्ध कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।

विधान परिषद की स्थापना और समाप्ति(Creation or Abolition of Legislative Council)-

अनुच्छेद 169 के अनुसार राज्य विधान सभा अपने – अपने कुल सदस्य के बहुमत से वोट डालने वाले सदस्य के ⅔  बहुमत से प्रस्ताव पास करके राज्य में विधान परिषद की स्थापना या समाप्ति के लिए को प्राथना कर सकती है।सांसद राज्य विधान सभा के प्रस्ताव पर कानून बना देगी।

 परंतु यह स्पष्ट नहीं है की राज्य विधान सभा द्वारा विधान परिषद की समाप्ति का प्रस्ताव के अनुसार सांसद के लिए कानून बनाने की जरूरी है या नहीं , यह समस्या 1970 में पैदा हुई थी।

1970 में बिहार विधान सभा ने विधान परिषद को समाप्त करने के संबंध में प्रस्ताव पास किया, परंतु सांसद ने इस प्रस्ताव के आधार पर कोई कानून नहीं बनाया। 14 नवंबर, 1970 में लोक सभा के स्पीकर स: गुरदयाल सिंह डीहलो ने बात का स्पष्टीकरण का आदेश दिया।

8 दिसंबर,1970 में कानून मंत्री ने लोक सभा में कहा की विधान सभा प्रस्ताव के आधार पर कानून बनाना सांसद की इच्छा पर निर्भर करता है। 29 मार्च, 1976 और 7 अप्रैल, 1993 में पंजाब विधान सभा ने विधान परिषद की स्थापना के लिए प्रस्ताव पास किया, परंतु अब तक सांसद ने कानून पास नहीं किया।

विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां

राज्य की विधान परिषद के पास नीचे लिखी हुई शक्तियां प्राप्त है –

  • वैधानिक शक्तियां(Legislative Powers)-
    विधान परिषद में उन सभी विषय के संबंध में साधारण बिल पेश किया जा सकता है जिन का संबंध राज्य सूची और समवर्ती सूची में किया गया, परंतु इस बिल को तब तक राज्यपाल के पास नहीं भेजा जा सकता जब तक विधान सभा पास ना करे।
    अर्थात विधान सभा की मंजूरी के बिना कोई काम नहीं बन सकता। परंतु विधान परिषद विधान सभा द्वारा पास किए गए बिल को ज्यादा से ज्यादा चार महीने तक रोक सकती है।
    जब कोई बिल विधान सभा से पास हो कर विधान परिषद के पास आता है तो विधान परिषद उस बिल को ना मंजूरी कर सकती है, बदल सकती है या तीन महीने तक बिल को कोई करवाई के लिए  रोक सकती है ।
    अगर विधान सभा उस बिल को पास कर कर देती है तो वह बिल विधान परिषद के पास भेज दिया जाता है। अगर विधान परिषद इस बिल को फिर से ना मंज़ूर कर दे या चार महीने तक कोई करवाई नहीं करे तो यह बिल दोनों सदनों द्वारा पास समझा जायेगा। इस लिए विधान परिषद साधारण बिल को ज्यादा से ज्यादा चार महीने तक ही रोक सकती है।
  • वित्तीय शक्तियां(Financial Powers)-
    विधान परिषद को कुछ वित्तीय शक्तियां तो प्राप्त तो है परंतु उनका महत्व कुछ भी नहीं। बजट या धन बिल विधान सभा में पास होने के बाद ही राज्य विधान मंडल के पास आता है।
    राज्य विधान मंडल बजट या धन बिल पर विचार कर सकती है, परंतु उस को रद्द नहीं कर सकती। विधान परिषद अगर धन बिल को रद्द कर दे या 14 दिन तक उस पर कोई करवाई ना करें या ऐसे सुझाव दे कर वापिस कर दे, जो विधान सभा को ना मंज़ूर हो, तब यह बिल सारी हालातों में दोनों सदनों द्वारा पास समझा जायेगा। स्पष्ट है की राज्य के वित्त और विधान परिषद को ना मात्र अधिकार प्राप्त है।
  • कार्यपालिका की शक्तियां(Executive Powers)-
    विधान परिषद कार्यपालिका को प्रभावित कर सकती है पर उस पर काबू नहीं रख सकती। विधान परिषद के सदस्य मंत्रियों से सवाल पूछ सकते है और ‘ कार्य रोको ‘ प्रस्ताव पेश कर के मंत्री मंडल की कमजोरियों और भ्रष्टाचार पर रोशनी डाल सकती है। और राज्य विधान मंडल की आलोचना कर सकते है। बजट पर बहस करते हुए भी विधान परिषद के सदस्य मंत्रियों की सख़्त आलोचना  कर सकते है,परंतु मंत्री मंडल सामूहिक रूप से विधान सभा प्रति उत्तरदाई है।
  •  संवैधानिक समारोह(Constitutional Functions)-
    विधान परिषद विधान सभा के साथ मिल कर संविधान की शोध में भाग लेती है, परंतु उस समय जब कोई भी बिल राज्य की मंजूरी के लिए भेजा जाए। परंतु संविधान का बहुत कम भाग ऐसा है की जिस को इस विधि द्वारा से बदला जा सकता है। 42 वीं शोध और 44 वीं शोध राज्य की मंजूरी के लिए भेजी गई थी।
  • विधान परिषद की स्थिति(Position of Legislative Council)-
    विधान परिषद विधान सभा के मुकाबले से एक बहुत छोटा सा सदन है। यह विधान सभा पर निर्भर करती है। विधान सभा विधान परिषद की समाप्ति के लिए प्रार्थना कर सकती है और सांसद उस प्रस्ताव के आधार पर कानून बना देगी।
    केवल एक कारण के आधार पर यह विधान सभा आगे सिर नहीं उठा सकती। मुकाबला करने की बात तो बहुत ही दूर है। विधान परिषद विधान सभा की इच्छा के विरुद्ध कोई कानून पास नहीं कर सकती।
    जब की विधान परिषद विधान सभा द्वारा पास किए गए साधारण बिल को ज्यादा से ज्यादा चार महीने के लिए रोक सकती है। कार्यपालिका पर विधान परिषद का नियत्रण नाम मात्र है। विधान परिषद के सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछ सकते है।मंत्रियों की आलोचना कर सकते है, परंतु अविश्वास प्रस्ताव पास करके हटा नहीं सकते।
    राज्य के वित्तीय विभाग पर भी राज्य मंडल के इस सदन पर कोई काबू नहीं है। धन बिल को विधान परिषद केवल 14 दिन तक रोक सकती है। विधान परिषद विधान सभा के मुकाबले में एक बिल्कुल शक्तिहीन सदन है।

Conclusion :

हमें उम्मीद है की आपको हमारा यह विधान परिषद क्या है? विधान परिषद के कार्य एवं शक्तियां क्या है? नामका आर्टिकल अच्छा और उपयोगी लगा। और विधान परिषद से संबंधित जानकारी प्राप्त हो गयी होंगी। हमारे आर्टिकल का उद्देश्य ही आपको सरल से सरल शब्दों में जानकारी प्रदान करवाना होता है , किन्तु अगर आपको मन में कोई सवाल है , तो आप हमे Comments के जरिए बता सकते है। हम आपके सभी सवालों का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। 
Source: Wikipedia
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